इंदौर रिपोर्टर संतोष बनोदिया,

  • मालवा निमाड़ में कांग्रेस ने दिखाई हिम्मत!
  • अपनो से मिल रहे झटकों से नहीं घबराया नया नेतृत्व!

इंदौर, मालवा निमाड़ के तय हुए तीन टिकटों को देख लग रहा है कि अपनों के द्वारा दिए जा रहे झटकों से कांग्रेस का नया नेतृत्व घबराया नहीं है। देरी से सही पर काफी सोच समझ कर टिकट तय किए जा रहे है। मालवा निमाड़ में फिलहाल तीन टिकट घोषित किए गए है पर स्थानीय सियासत पर गौर करे तो साफ दिखता है कि कांग्रेस ने भाजपा के सामने पेंच उलझाने का काम तो किया है। सूबे में तय हुए तीनों नाम पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की पसंद के है। पार्टी ने टिकट के लिए चल रहे किसी नाम पर गौर ना करते हुए युवा, नए और उर्जावान चेहरों पर दांव लगाया। धार और खरगोन जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है और देवास अनुसूचित जाति वर्ग की सीट है। कांग्रेस ने इन तीनों सीटों पर सामाजिक आधार तथा प्रत्याशियों की स्वयं की मेहनत का आधार बनाया। धार में राधेश्याम मुवेल, खरगोन में पोरलाल खरते और देवास में राजेंद्र मालवीय को टिकट दिया गया है। सूबे की पांच सीट पर कांग्रेस ने टिकट होल्ड पर रखे है। गौरतलब है कि भाजपा ने भी इंदौर, उज्जैन और धार में प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है।

नौकरी छोड़ कर कांग्रेस से जुड़े खरते :-

खरगोन सीट से प्रत्याशी बनाए गए पोरलाल खरते स्टेट जीएसटी (सेल्स टेक्स) डिपार्टमेंट में ऑफिसर थे। वे आदिवासी कर्मचारी अधिकारी संघ (आकास) के पदाधिकारी रहे और इसी संगठन के जरिए सियासी जमीन तलाशने लगे। नौकरी छोड़ कर वे कांग्रेस से जुड़ गए। सैंधवा विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दांवेदार भी वे थे मगर पार्टी ने टिकट नहीं दिया। आदिवासी एकता के नाम पर उन्होंने पूरे जिले में रैली की और जबरदस्त माहौल बनाया। लिहाजा पार्टी ने भी उन पर भरोसा जताते हुए एक बड़ा दांव खेल दिया।

युवाओं में लोकप्रिय मुवेल :-

धार सीट पर भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले है। इस बीच कांग्रेस ने कार्यवाहक जिलाध्यक्ष राधेश्याम मुवेल को धार से प्रत्याशी घोषित कर दिया। मुवेल मनावर से विधानसभा टिकट के प्रबल दांवेदार थे और डॉ हिरा अलावा के खिलाफ पर्चा भी दाखिल कर चुके थे। वरिष्ठों की समझाई के बाद उन्होंने नाम वापस लिया। तब पार्टी ने उन्हें जिला कार्यवाहक अध्यक्ष मनोनित किया। धार्मिक आयोजनों के जरिए युवाओं में मूवेल ने खास पैंठ बना रखी है। आदिवासी युवाओं की एक बड़ी टीम उनसे जुड़ी है तथा सोशल मीडिया पर भी वे काफी सक्रिय रहते है।

सामाजिक गणित ने दिलाया राजेंद्र को टिकट :-

देवास सीट से सज्जन वर्मा ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। चेहरा नया हो और क्षेत्र में जातिगत आधार पर समिकरण भी बैठ जाए इस आधार पर नामों पर विचार शुरू हुआ। राजेंद्र मालवीय का नाम सबसे उपयुक्त माना गया। राजेंद्र के पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. राधाकिशन मालवीय ने देवास लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया है। हालांकि राजेंद्र को दो बार विधानसभा चुनाव हार चुके है। फिर भी कांग्रेस को उम्मीद है कि जातिगत वोट और स्व मालवीय का नाम कुछ करिश्मा जरूर दिखाएंगा।