इंदौर रिपोर्टर संतोष बनोदिया,
- कांग्रेस से विधानसभा चुनाव लड़ा, ताकि भाजपा को मिले फायदा !
कांग्रेस के टिकट पर महू विधानसभा से चुनाव लड़े रामकिशोर शुक्ला का बयान!
महू से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े रामकिशोर शुक्ला के भाजपा में लौटने पर बवाल मचा हुआ है। इस बीच शुक्ला ने दावा किया है कि भाजपा को जिताने के लिए संघ के मित्रों व उषा ठाकुर के कहने पर कांग्रेस में गए थे और चुनाव लड़े। चुनाव से पहले नहीं लग रहा था कि उषा दीदी जीतेंगी। तब मैंने ये फैसला किया था।

भाजपा भले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अनुषांगिक संगठन है, लेकिन वह हमेशा से स्पष्ट करता आया है कि राजनीति से उसका लेना-देना नहीं है। ये काम भाजपा का है। राजनीतिक क्षेत्र में उनका कोई खुला हस्तक्षेप नहीं होता है। हालांकि शुक्ला का दावा है कि संघ के मित्रों के कहने पर ही मैंने वह चुनाव लड़ा था। उनका कहना था कि दीदी को जिताना है। उस समय की विपरीत परिस्थितियों से संघ के लोग चिंतित थे। उनका मानना था कि कांग्रेस के पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगे, जिसकी व्यवस्था पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कर ली है। मैंने चुनाव लड़ने से पहले दीदी (उषा ठाकुर) से अनुमति ली थी। शुक्ला ने अपने इन दावों का एक पत्र जारी किया है।
दीदी को भी नहीं थी कल्पना:-
शुक्ला का कहना है कि इन सभी घटनाक्रमों के बाद तय रणनीति के तहत मुझे चुनावी महाभारत में कांग्रेस के चक्रव्यूह में भेजा, जिसमें मैं वीरगति को प्राप्त हुआ और पांडवों की विजय हुई। उषा दीदी 34 हजार मतों से विजयी हुई, जिसकी कल्पना उन्हें भी नहीं थी।
पैसे देकर नहीं लाया टिकट:-
शुक्ला का कहना है कि मेरे पैसे लेकर टिकट लाने की बात भी सामने आई थी। कमलनाथ बड़े आदमी हैं और मैं उनकी प्रशंसा करता हूं। उन्होंने अपने दम पर दो बार विधानसभा चुनाव कांग्रेस को लड़ाया। टिकट के लिए पैसे देने की बात गलत है, उल्टा उन्होंने सभी प्रत्याशियों को पैसे दिए। किसी भी सीट पर लेन-देन नहीं हुआ। कांग्रेस में जाने के बाद टिकट मिलने की कहानी बताते हुए शुक्ला ने कहा कि टिकट दिलाने में मेरी मदद सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी और अन्य मित्रों ने की। गौरतलब है कि पूर्व में शुक्ला बोले थे कि कांग्रेस में बगैर लेन-देन के कुछ नहीं होता है।

